खूबसूरती
खूबसूरत
तुम खूबसूरत हो !
जब भी ये शब्द जहन मे आता है ,
क्यू जिस्म की बनावट रंग और रूप नजर को आता है ।
जतन इसे उबारने की सब बेशुमार करते है ,
दिखावे की बस्ती में दिखावे का प्रचार करते है ।
जो भी परखा है चलो उसपे इक व्यंग सुनता हूं -
" पड़ोस वाले ने इक बहू व्याह लाई थी ,
नई नवेली थी तो चर्चे उसी की छाई थी ,
कोई पूछता रंग कैसा है ?
कोई चेहरे की बनावट , तो कोई कद की बात करता था ।
ऐसे सवालों से तो भरा पड़ा खेमा था ,
कोई ना था जिसने पूछा आचरण और संस्कार का ,
इसी बात का दुख और इसी बात का रोना था ।
जब सुना इन बातों को एक बच्ची ने ,
असर गहरा उन बातों का उसपर तासीर हुआ ।
निश्चय किया सुंदर दिखूंगी रंग रूप को संवार लूंगी ।
कोई विचार ना उठा उसके मन में मन का ,
ना जाने इंसान की क्या तालीम हुई ! "
मन की सुंदरता पर अब कोई काम नहीं होता ,
रहा ना मोल मन का इसका तो अब नाम नहीं होता ।
अबकी बार जब भी बात खूबसूरती की आये ना ,
तन की छोड़ मन की सोच लेना ,
हां मन पे भी थोड़ी काम कर लेना ,
सुंदर सिर्फ रूप नहीं विचार कर लेना ।
क्यूकी मन की खूबसूरती का जब आभास होगा ,
जीवन में इन्सान की अहमियत का एहसास होगा ।
जब तन से बढ़कर मन का ध्यान होगा ,
वसुधा पर तभी समाज सुंदर निर्माण होगा ।
- अभिषेक
हां तुम भी खूबसूरत हो ।
ReplyDeleteThank you ❤️
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